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चूहे की दिल्ली-यात्रा

Posted: 22-03-2018 | Writer - Ramdhari Singh Dinkar

चूहे ने यह कहा कि चूहिया! छाता और घड़ी दो, लाया था जो बड़े सेठ के घर से, वह पगड़ी दो। मटर-मूँग जो कुछ घर में है, वही सभी मिल खाना, खबरदार, तुम लोग कभी बिल से बाहर मत आना!

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चांद का कुर्ता

Posted: 22-03-2018 | Writer - Ramdhari Singh Dinkar

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, ‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला...

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मिर्च का मज़ा

Posted: 22-03-2018 | Writer - Ramdhari Singh Dinkar

एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी, लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में पानी। सोचा, क्या अच्छे दाने हैं, खाने से बल होगा, यह जरूर इस मौसम का कोई मीठा फल होगा।

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सूरज का ब्याह

Posted: 22-03-2018 | Writer - Ramdhari Singh Dinkar

उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है, वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने वाली है। मोर करेंगे नाच, गीत कोयल सुहाग के गाएगी, लता विटप मंडप-वितान से वंदन वार सजाएगी!

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भारत बंद

Posted: 15-03-2018 | Writer - Kavita Tiwari

देशभक्ति का ज्वार है उमड़ा, मंद नहीं होगा, तुम चीख- चीख कर मर जाओ, भारत बंद नहीं होगा

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शहीद के बेटे की दीपावली

Posted: 09-03-2018 | Writer - Anamika Jain Amber

चारो तरफ़ उजाला पर अँधेरी रात थी। वो जब हुआ शहीद उन दिनों की बात थी॥ आँगन में बैठा बेटा माँ से पूछे बार-बार। दीपावली पे क्यो ना आए पापा अबकी बार॥ माँ क्यो न तूने आज भी बिंदिया लगाई है ?

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महफ़िल महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

महफ़िल महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है खुद ही खुद को समझाना तो पड़ता है, उनकी आँखों से होकर दिल तक जाना, रस्ते में ये मैखाना तो पडता हैं

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कुछ छोटे सपनो के बदले

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

कुछ छोटे सपनो के बदले, बड़ी नींद का सौदा करने, निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे !

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खुद को आसान कर रही हो ना

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

खुद को आसान कर रही हो ना हम पे एहसान कर रही हो ना, ज़िन्दगी हसरतों की मय्यत है, फिर भी अरमान कर रही हो ना

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हम कबीर के वंशज चुप कैसे रहते

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

वे बोले दरबार सजाओ वे बोले जयकार लगाओ, वे बोले हम जितना बोले, तुम केवल उतना दोहराव

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हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें, कितने एकाकी हैं प्यार कर तुम्हें, जिस पल हल्दी लेपी होगी तन पर माँ ने, जिस पल सखियों ने सौंपी होंगीं सौगातें, ढोलक की थापों में, घुँघरू की रुनझुन में, घुल कर फैली होंगीं घर में प्यारी बातें

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होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो, होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

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पगली लड़की

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

मावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है, जब दर्द की काली रातों में गम आंसू के संग घुलता है, जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं, जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं,सब सोते हैं, हम रोते हैं,

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कोई दीवाना कहता है

Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

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