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Posted: 17-03-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

आँखों में अश्क ,पर अधरों पे मुस्कान क्यूँ है !
उस पगली के लिए ,दिल इतना परेशान क्यूँ है !!
हम वक्त से हैं वाकिफ ,फिर भी इतने अनजान क्यूँ हैं !
बावले दिल को कौन समझाये ,आखिर ये इतना नादान क्यूँ है !!

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

आज वो फिर मुझे देखकर मुस्कुराया है 
लगता है कोई काम निकल आया है !!

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Posted: 23-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

मजबूर नहीं करेंगे तुझे वादा निभाने के लिए
तू एक बार आ अपनी यादे वापस ले जाने के लिए

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Posted: 23-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

आज फिर से मुस्कराने का जी चाहता है 
तेरी यादो में खो जाने का जी चाहता है ,
शायद तू सपनो में ही मिल जाये ,इसलिए 
अब तो सदा के लिए सो जाने का जी चाहता है

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Posted: 22-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

इस अंधियारी रात में ,जुगनू के घर का कोई पता बता दे !!

ये खुदा मत ले इतने इम्तिहाँ ,अब तो मेरी खता बता दे  !!

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Posted: 04-06-2018 | Writer - vishnu saxena

बेसुरे साज़ पर भी गीत गाने लगते हैं,
ज़रा सी ठेस पर आंसू बहाने लगते हैं|
इतने नादान हैं ये लड़के इन्हे न तंज करो,
तेज बारिश में पतंगे उडाने लगते हैं||

ये तो पत्थर में भी मूरत उभार देते हैं,
भरते हैं रंग और फ़िर निखार देते हैं|
इतने भोले हैं ये लड़के ये जानते ही नही ,
एक मुस्कान पे जीवन गुजार देते हैं ||

ख्वाब आंखों में लिए प्यार के जब सोते हैं ,
टूटती नीद तो फ़िर जार जार रोते हैं |
प्यार का दर्द तो होता बहुत मीठा पर,
फ़िर भला आंसूं ये नमकीन से क्यों होते हैं||

फूल को तोड़ना था शाख को क्यों तोड़ दिया,
तय था इधर आना तो रुख क्यों उधर मोड़ लिया|
हमको अपना बना के छोड़ने का दावा किया,
आज अपना बनाया और यु ही छोड़ दिया ||
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Posted: 04-06-2018 | Writer - Unknown

एक हाथ में दिल उनके एक हाथ में खंजर था
चेहरे पे दोस्त का मुखौटा अजीब सा मंजर था

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

अब जुदाई के सफ़र को मेरे आसान करो

तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

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Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

चंद चेहरे लगेंगे अपने से ,

खुद को पर बेक़रार मत करना ,

आख़िरश दिल्लगी लगी दिल पर?

हम न कहते थे प्यार मत करना…!!

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Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है,

और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है,

मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल,

भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है..!!

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Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

वो जिसका तीरे छुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से
यहां खत भी जरा सी देर में अखबार होता है।

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Posted: 08-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है
और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है
मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल
भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है।

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