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Posted: 22-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

इस अंधियारी रात में ,जुगनू के घर का कोई पता बता दे !!

ये खुदा मत ले इतने इम्तिहाँ ,अब तो मेरी खता बता दे  !!

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Posted: 22-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

ये दोस्त मेरे एहसानों का कर्ज बस इतना चूका देना 
मुझे याद करके आप थोड़ा सा मुस्कुरा देना !!

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Posted: 22-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

अपनी खुशियों के बदले ,उनके  गम हर बार माँग लू
करे खुदा यदि  सौदा, तो अपनी दोस्त  की मुश्किलें उधार माँग लू
न तमन्ना मुझे किसी दौलत की ,न अपनी खुशियों की है दरकार
हे प्रभु कुछ देना चाहो ,तो  देना हर जन्मो में मुझे ऐसा ही सच्चा  यार

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Posted: 22-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

आज ओ फिर देखके मुस्कुराया है  !

लगता है कोई फिर काम निकल आया है  !!

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Posted: 22-02-2018 | Writer - Ranjan Kumar Pandit

इस अंधियारी रात में ,जुगनू के घर का कोई पता बता दे !

ये खुदा मत ले इतने इम्तिहाँ ,अब तो मेरी खता बता दे !!

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Posted: 04-06-2018 | Writer - vishnu saxena

बेसुरे साज़ पर भी गीत गाने लगते हैं,
ज़रा सी ठेस पर आंसू बहाने लगते हैं|
इतने नादान हैं ये लड़के इन्हे न तंज करो,
तेज बारिश में पतंगे उडाने लगते हैं||

ये तो पत्थर में भी मूरत उभार देते हैं,
भरते हैं रंग और फ़िर निखार देते हैं|
इतने भोले हैं ये लड़के ये जानते ही नही ,
एक मुस्कान पे जीवन गुजार देते हैं ||

ख्वाब आंखों में लिए प्यार के जब सोते हैं ,
टूटती नीद तो फ़िर जार जार रोते हैं |
प्यार का दर्द तो होता बहुत मीठा पर,
फ़िर भला आंसूं ये नमकीन से क्यों होते हैं||

फूल को तोड़ना था शाख को क्यों तोड़ दिया,
तय था इधर आना तो रुख क्यों उधर मोड़ लिया|
हमको अपना बना के छोड़ने का दावा किया,
आज अपना बनाया और यु ही छोड़ दिया ||
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Posted: 04-06-2018 | Writer - vishnu saxena

तपती हुई ज़मीं है जलधार बाँटता हूँ
पतझर के रास्तों पर मैं बहार बाँटता हूँ
ये आग का दरिया है जीना भी बहुत मुश्क़िल
नफ़रत के दौर में भी मैं प्यार बाँटता हूँ

विष्णु सक्सेना

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Posted: 04-06-2018 | Writer - vishnu saxena

अब भी हसीन सपने आँखों में पल रहे हैं
पलकें हैं बंद फिर भी आँसू निकल रहे हैं
नींदें कहाँ से आएँ बिस्तर पे करवटें ही
वहाँ तुम बदल रहे हो यहाँ हम बदल रहे हैं

विष्णु सक्सेना

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Posted: 04-06-2018 | Writer - vishnu saxena

बरसात भी नहीं है बादल गरज रहे हैं
सुलझी हुई लटे हैं और हम उलझ रहे हैं
मदमस्त एक भँवरा क्या चाहता कली से
तुम भी समझ रहे हो हम भी समझ रहे हैं

विष्णु सक्सेना

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Posted: 04-06-2018 | Writer - vishnu saxena

ओ जवान धड़कनों तुम, मेरा सलाम लेना
सीखा नहीं है मैंने, हाथों में जाम लेना
फ़िसलन बहुत है यारो, राहों में मुहब्बत की
कहीं मैं फिसल न जाऊँ, तुम हाथ थाम लेना

विष्णु सक्सेना

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Posted: 04-06-2018 | Writer - Unknown

एक हाथ में दिल उनके एक हाथ में खंजर था
चेहरे पे दोस्त का मुखौटा अजीब सा मंजर था

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Posted: 14-04-2018 | Writer - Unknown

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Posted: 14-04-2018 | Writer - Unknown

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Posted: 14-04-2018 | Writer - Unknown

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Posted: 14-04-2018 | Writer - Unknown

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Posted: 14-04-2018 | Writer - Unknown

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Posted: 17-03-2018 | Writer - Kavita Tiwari


मैं भारत वर्ष का हरदम अमिट सम्मान करती  हूँ  
यहां की चंदनी मिट्टी का ही  गुणगान करती हूँ 
मुझे इक्षा  नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की 
तिरंगा हो कफ़न मेरा यही अरमान रखती हूँ 

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार

दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर

मेरी शह-रग पे मिरी माँ की दुआ रक्खी थी

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

भारी बोझ पहाड़ सा कुछ हल्का हो जाए

जब मेरी चिंता बढ़े माँ सपने में आए

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई

मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा

अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं

लड़कियाँ धान के पौदों की तरह होती हैं

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है

मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है

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Posted: 16-03-2018 | Writer - Munawwar Rana

अब जुदाई के सफ़र को मेरे आसान करो

तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

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Posted: 15-03-2018 | Writer - Kumar Vishwas

एकता बाँटने में माहिर है ,
खुद कि जड़ काटने में माहिर है 
हम क्या थूके उस सख्स पे जो खुद ,
थूक कर चाटने में माहिर है cheekycheeky

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Posted: 09-03-2018 | Writer - Anamika Jain Amber

चंदा की चकोरी से कोई बात ना होती,
जो तुमसे हमारी ये मुलाकात न होती |
इस शहर के लोलोगों में कोई बात है ‘अम्बर’,
वरना तो कभी इतनी हसीं रात ना होती ||

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Posted: 09-03-2018 | Writer - Anamika Jain Amber

मैं तुझे जान लूं तू मुझे जान ले,
मैं भी पहचान लूं तू भी पहचान ले |
है बहुत ही सरल प्रेम का व्याकरण,
मैं तेरी मान लूं तू मेरी मान ले ||

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Posted: 09-03-2018 | Writer - Anamika Jain Amber

शाम भी ख़ास है वक़्त भी ख़ास है,
मुझको अहसास है तुझको अहसास है |
इससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए,
मैं तेरे पास हूँ तू मेरे पास है ||

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Posted: 09-03-2018 | Writer - Anamika Jain Amber

चाँद बिन चांदनी रात होती नहीं,
ना हो बादल तो बरसात होती नहीं |
शब्द मजबूर हैं व्यक्त क्या क्या करें,
प्रेम जब हो मुखर बात होती नहीं ||

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